जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद की प्रबंधन विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रचना श्रीवास्तव ने श्रीलंका में प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ कॉल्मंबो में आयोजित दसवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत कर न केवल विश्वविद्यालय, बल्कि पूरे जिले और देश का मान बढ़ाया है। यह सम्मेलन 26 से 27 जनवरी 2026 को वैश्विक वाणिज्य का पुनर्संतुलन : विघटन, विविधीकरण और नई व्यापारिक वास्तविकताओं का मार्गदर्शन विषय पर आयोजित किया गया था। इसमें विभिन्न देशों के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महिला शिक्षाविद का भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना महिला सशक्तिकरण की मिसाल माना जा रहा है। डॉ. रचना श्रीवास्तव ने समावेशी एवं सांस्कृतिक रूप से सजग नेतृत्व : अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भगवद्गीता के सिद्धांतों का अनुप्रयोग” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया।
उन्होंने भगवद्गीता के ‘निष्काम कर्म’ सिद्धांत को आधुनिक वैश्विक नेतृत्व और प्रबंधन से जोड़ते हुए बताया कि जब नेतृत्वकर्ता स्वार्थ से ऊपर उठकर कर्तव्यनिष्ठा और नैतिकता के आधार पर निर्णय लेते हैं, तो संगठन अधिक समावेशी, संवेदनशील और संतुलित बनते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यापारिक परिवेश में निरंतर परिवर्तन, प्रतिस्पर्धा और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच नेतृत्व को धैर्य, आत्मनियंत्रण और व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। भगवद्गीता का ‘निष्काम कर्म’ सिद्धांत नेतृत्व को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सामूहिक कल्याण की भावना से कार्य करने की प्रेरणा देता है।
इससे संगठनात्मक वातावरण में पारदर्शिता, सहयोग और दीर्घकालीन स्थिरता को बल मिलता है। डॉ. श्रीवास्तव की यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। यह दर्शाता है कि आज की महिलाएं शिक्षा, शोध और वैश्विक विमर्श के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन और वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय ने उनकी उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा में वृद्धि बताया है। जिले के लिए भी यह गौरव का विषय है कि यहां की एक महिला शिक्षाविद ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रचना श्रीवास्तव ने कजाकिस्तान में हुए 9वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत किया। यह अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 28 से 31 जनवरी तक कॉमर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया और तुरान यूनिवर्सिटी, अल्माटी (कजाकिस्तान) के संयुक्त तत्वावधान में हुई थी। यह सम्मेलन ब्रिजिंग ग्लोबलाइजेशन एंड सस्टेनेबिलिटी चैलेंजेज स्ट्रेटेजीज एंड द वे फॉरवर्ड विषय पर हुआ था। इस दौरान विशेषज्ञों ने डॉ. रचना श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत सस्टेनेबल ग्रोथ थू्र द लेंस ऑफ पंचतत्व ब्रिजिंग इकॉनमी एंड इकोलॉजी विषयक शोध पत्र को सराहा गया। उन्होंने शोध की गहराई, उसकी नवीनता और प्रभावशाली प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह शोध भविष्य के शोधार्थियों और नीति-निर्माताओं के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। सम्मेलन के आयोजकों ने उनके अभूतपूर्व योगदान को मान्यता देते हुए विशेष सम्मान से नवाजा। डॉ. रचना ने कहा कि उन्हें गर्व है कि चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय की शिक्षिका, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। यह न केवल मेरे लिए बल्कि विश्वविद्यालय के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।